Saturday, February 13, 2010

कैसे


कैसे तुम्हे मै भुलाऊ
तुम तो हर कोने मै बसते हो
कैसे तुमको मै बताऊ
तुम तो मेरे रूह को रचते हो
कैसे उन बिखरे मोतियो को समेटू
जो तुम्हारे स्पर्श के लिए
फर्श पर बिखरे परे
कैसे तोडू उस चादर की सिलवटो को
जो तुम्हारे स्पर्श की याद दिलाती है
कैसे सवारू उलझे लटो को अपनी
जिसे तुमने अपनी उंगलियो से सवारा था

कैसे हटाऊ बिखरे काजल को अपने आँखों से
कैसे छुपाऊ आचल को अपनी आहो से
जिसमे आज भी तुम्हारी खुसबू बस्ती है
कैसे सवारू उस कमरे को
जिसके हर कोने मे तुम बसते हो
वो मुरझाये कुचले सूखे मोगरे के फूल
आज भी उलझी लटो से उल्हज रहे है
उस मोमबत्ती की पिघली धार
आज भी तरस रही है जलने को
कैसे सवारू फिर से उस कमरे को
जिसके हर तिनके मे तुम बसते हो
कैसे तुमको मे छुपाऊ
कैसे तुमको मे भुलाऊ



4 comments:

  1. pyar ki nishani ko badi shiddat se saheja aur snajoya hai aapne... bahut hi emotional kaivta...

    ReplyDelete
  2. kirti......thoda aur gahare utro.....thoda aur socho.....aur acchha likh paaogi....!!

    ReplyDelete